यूनानी समुद्र से मिला 2000 साल पुराना कंप्यूटर, जो आज AI को रास्ता दिखा रहा

Antikythera Mechanism दुनिया का पहला कंप्यूटर माना जाने वाला प्राचीन यूनानी यंत्र था। uplive24.com पर जानिए कैसे इस खोज ने आज चीन को प्रेरित किया, जिससे उसने AI के लिए नई एनालॉग चिप तैयार की, जो हजारों साल पुराने विज्ञान को भविष्य से जोड़ती है।

कभी-कभी इतिहास अपने रहस्यों के साथ भविष्य का रास्ता भी दिखा देता है। यही कहानी है Antikythera Mechanism की। एक ऐसा रहस्यमयी यंत्र, जिसे अक्सर दुनिया का पहला कंप्यूटर कहा जाता है। लगभग दो हजार साल पहले ग्रीस के वैज्ञानिकों ने इसे बनाया था, जब न तो बिजली थी, न कोई डिजिटल तकनीक। फिर भी इस छोटे-से धातु के बॉक्स में ऐसी यांत्रिक बुद्धिमत्ता थी कि वह सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की गति का सटीक गणना कर सकता था।

साल 1901 की बात है। ग्रीस के एंटीकिथेरा द्वीप के पास, स्पंज डाइवर्स एक जहाज के मलबे की तलाश में 45 मीटर गहरे समुद्र में उतरे। वहां उन्हें सोने-चांदी के बर्तन, मूर्तियां और सिक्कों का ढेर मिला। लेकिन सबसे हैरान करने वाली चीज थी एक जंग लगी हुई कांस्य की डिब्बी, जो जूते के डिब्बे जितनी बड़ी थी। अंदर मिला 30 से ज्यादा जटिल गियरों का जाल, जो घड़ी की तरह कटे हुए थे। यह था एंटीकिथेरा मैकेनिज्म (Antikythera Mechanism), रोमन जहाज का माल जो पहली शताब्दी ईसा पूर्व डूब गया था। 

शुरू में वैज्ञानिक इसे पहचान ही नहीं पाए। किसी ने कहा यह ज्योतिषी का खिलौना है। किसी ने सोचा कि शायद एलियन टेक्नोलॉजी! लेकिन 2005 में एक्स-रे टोमोग्राफी ने राज खोल दिया। यह कोई साधारण घड़ी नहीं, बल्कि दुनिया का पहला एनालॉग कंप्यूटर था। यह गणनाओं को बिजली की बजाय यांत्रिक गियरों से करता था – ठीक वैसे ही जैसे आज के एनालॉग सिस्टम।

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प्राचीन 'कंप्यूटर' क्या-क्या कर सकता था? 

जादू की तरह गणनाएं! अब सोचिए, अगर आपके पास एक ऐसा बॉक्स होता जो बिना बैटरी के ग्रहों की भविष्यवाणी कर दे! एंटीकिथेरा मैकेनिज्म (Antikythera Mechanism) ठीक वैसा ही था। ये 82 टुकड़ों में बंटा हुआ था। इसके गियर बेहद सटीक थे।

ग्रहों की स्थिति बताता था : सूर्य, चंद्रमा और उस समय तक पांच ज्ञात ग्रहों (बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि) की चाल को ट्रैक करता। जटिल खगोलीय मॉडल बनाता। 

ग्रहणों की भविष्यवाणी : चंद्र और सूर्य ग्रहण कब होंगे, दशकों पहले बता देता। बेबीलोनियन साइकिल्स (जैसे 19 साल का मेटोनिक साइकिल) पर आधारित। 

ओलंपिक गेम्स की तारीखें : प्राचीन ओलंपियाड्स (चार साल का चक्र) और अन्य खेलों की डेट्स कैलकुलेट करता। ऊपर की तरफ zodiac डायल था, नीचे कैलेंडर।

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चंद्र कैलेंडर : सरोस साइकिल (18 साल 11 दिन) से चंद्रमा के चरण दिखाता।

कांस्य शीट से बने ये गियर इतने बारीक थे कि मध्ययुगीन घड़ियों से 1000 साल पहले का टेक्नोलॉजी लेवल दिखाते हैं। ग्रीक दार्शनिकों जैसे प्लेटो और आर्किमिडीज की बुद्धि का कमाल! 

इतनी उन्नत तकनीक कहां गायब हो गई? शायद युद्धों और आग लगने से नष्ट हो गई। यह खोज साबित करती है कि प्राचीन ग्रीस सिर्फ मंदिर बनाने वाले नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग के जीनियस थे।

Antikythera Mechanism से सीखकर चीन का कमाल

आज, जब दुनिया AI के युग में जी रही है, वही Antikythera Mechanism फिर चर्चा में है - इस बार चीन की एक नई तकनीकी खोज के कारण। हाल ही में चीन के वैज्ञानिकों ने एक एनालॉग AI चिप तैयार की है, जो पुराने डिजिटल प्रोसेसरों से लगभग 1,000 गुना तेज बताई जा रही है। यह चिप पारंपरिक डिजिटल पद्धति पर नहीं, बल्कि एनालॉग गणना (Analog Computing) पर आधारित है, यानी वही सिद्धांत, जो हजारों साल पहले Antikythera Mechanism में उपयोग हुआ था।

दरअसल, Antikythera Mechanism को आप एक एनालॉग मॉडल कह सकते हैं - एक ऐसा यंत्र जिसमें धातु के गियर्स और घूमते पहिए ब्रह्मांड की चाल को यांत्रिक रूप में साकार करते हैं। चीन के वैज्ञानिकों का कहना है कि उनकी नई चिप भी उसी सिद्धांत पर आगे बढ़ती है, जहां गणनाएं विद्युत संकेतों की जगह भौतिक पैटर्न के जरिए होती हैं। 

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यह तरीका ऊर्जा की खपत को कम करता है और गति को कई गुना बढ़ा देता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तकनीक से भविष्य के AI मॉडल न केवल तेज चलेंगे, बल्कि बहुत कम बिजली में भी काम कर सकेंगे।

मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि इस नई एनालॉग AI चिप के डिजाइन को Antikythera Mechanism से प्रेरणा मिली है। जैसे उस समय के यूनानी वैज्ञानिकों ने यांत्रिक पहियों से ब्रह्मांड की गणना की थी, वैसे ही आज के चीनी वैज्ञानिक इलेक्ट्रॉनिक परतों से मशीन लर्निंग की गति बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यह किसी वैज्ञानिक पुनर्जन्म जैसा है। दो हजार साल पुराना विचार, अब आधुनिक रूप में वापस आ रहा है।

Antikythera Mechanism हमें यह याद दिलाता है कि मानव बुद्धि की सीमाएं केवल तकनीक से नहीं तय होतीं। ज्ञान का प्रवाह समय के साथ बदलता रहता है — कभी गियर्स में छिपा होता है, तो कभी चिप्स में। जो Antikythera के धातु पहियों में घूमता था, वही अब सिलिकॉन के भीतर बह रहा है।

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